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Thursday, 12 June 2014

“अमित“ वो “अमिट“ कहानी बन!!

बयां ना हो जो चंद लफ्ज़ों में,
वो “अमिट“ कहानी बन,
रोक ना सके कोई चट्टान तुझे,
“अमित“ वो बहता पानी बन,
चलता चल तू बढ़ता चल,
"कदम ताल" तू करता चल,
“अस़फार“ तू किए जा,
“अदीब“ बन तू नसीब बन, 
मिलेंगे बहुत “अज़ाब“ तुझे,
उनकी तू परवाह ना कर,
छोड़ दे “झूठ“ का "अंजूमन",
सच का ऐसा अफसाना बन,
वो “अमिट“ कहानी बन तू,
“अमित“ वो “अमिट“ कहानी बन!!
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.--Copy Right @ AMIT SAINI
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अमिट: कभी न मिटने वाला
कदम ताल: कदम से कदम मिलाकर चलना
अस़फार: यात्राएंे
अदीब: विद्वान
अज़ाब: पीड़ा, दंड़
अंजुमन: सभा

Wednesday, 12 March 2014

जिंदगी में एक दिन 'जिदंगी' से मुलाकात हुई........

जिंदगी में एक दिन 'जिदंगी' से मुलाकात हुई,

साथ बैठे, चाय पी और कुछ बात हुई।

बोली जिंदगी, प्यार एक धोखा है, फरेब है,

हमने कहा, जिंदगी तू खुद एक धोखा है,

बेवफा है, कपटी है, एक छलावा है,

मुहब्बत बिन तू अधूरी है, बदरंग है, बेमिजाज है,

बीच मझधार में हर किसी को छोड़ जाती है,

मरने में बाद भी मुहब्बत ही साथ निभाती है,

चिढ़ गई जिंदगी, मुझसे रूठ गई जिंदगी,

कहने लगी, बकवास है, सब झूठ है,

प्यार में मरने वाले सबसे बड़ा बेवकूफ है,

इश्क में मिलती केवल रूसवाई है,

नींद चली जाती है, करार खो जाता है,

मर पाता है इंसान न चैन से जी पाता है,

खाता है ना पीता है, हरदम बैचेन सा रहता है,

जाते हुए कुछ इस तरह से मुस्कुराकर बोली 'जिंदगी',

महबूब को मत मान खुदा, इक दिन धोखा खाएगा,

समझ में आएगा जब तक, सब कुछ तेरा लुट जाएगा,

जख्म होगें इतने गहरे, कभी ना भर पाएंगे,

एक दिन तू ही कहेगा, जिंदगी तू जीती मैं हारा,

सच कहा था तूने, प्यार का दूसरा नाम ही बेवफाई है...........


Wednesday, 5 March 2014

......खामोशी को मेरी कमजोरी ना समझ !


खामोशी को मेरी कमजोरी ना समझ,
"जलजला: हूं, हस्ती मिटाना जानता हूं !!

नरम तो केवल स्वभाव है हमारा,
"दहाड़ना" वरना बखूबी जानता हूं !!

झुका था "इबादत" में सिर उसकी,
भ्रम पालकर तू नादानी ना कर !!

गर मिला मौका तो बता दूंगा,
हर रिश्ता निभाना जानता हूं !!

प्यार में अपनी जान देना ही नहीं,
दुश्मनी में सिर कलम करना भी जानता हूं।।






Thursday, 27 February 2014

बचपन में किताब में पढ़ा था, अब तक अमल करता हूं!

बचपन में किताब में पढ़ा था, अब तक अमल करता हूं कि......
धागा अगर टूट जाएं तो वह जुड़ता नहीं, अगर जुड़ता भी है तो उसमें गांठ आ जाती है। 
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इसी तरह से दोस्ती और मौहब्बत में अगर एक बार दरार आ जाएं तो फिर पहले जैसे बात नहीं रह जाती।
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इसी का एक पहलू है कि रस्सी को इतना मत खींचों की वह टूट जाएं। यानि अगर कोई आपको बेहद प्यार करता हो, मान-सम्मान और इज्जत देता हो तो उसका अनादर मत करों। उसे और उसकी भावना को समझों। जरूरी नहीं है कि आपको मान-सम्मान देने के पीछे कोई हित छिपा हो।
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कोशिश करता हूं कि ईंट का जवाब पत्थर दे दूं अर्थात 20 फीसदी सत्कार करने वाले को मैं 100 फीसदी सम्मान दूं। (-Amit Saini)
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दिल को अब किसी से कोई गिला नहीं,
मन से जो भी चाह वो मिला नहीं,
बदनसीबी कहूँ या वक्त की बेवफाई,
अँधेरे में एक दिया मिला पर वो भी जला नहीं !!!